अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य| अनुशासनात्मक कार्यवाही|मौलिक रिक्ति|मौलिक सेवाएं|परिवीक्षा काल |परवीक्षा काल की समाप्ति पर वह स्वतः |सेवापंजिका |पदोन्नति |अनुशासनात्मक कार्यवाही

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य| अनुशासनात्मक कार्यवाही|मौलिक रिक्ति|मौलिक सेवाएं|परिवीक्षा काल |परवीक्षा काल की समाप्ति पर वह स्वतः |सेवापंजिका |पदोन्नति |अनुशासनात्मक कार्यवाही   शिक्षक के सम्बंध में महत्त्वपूर्ण



शिक्षक के सम्बंध में महत्त्वपूर्ण जानकारियां                          


सम्मानित शिक्षक साथियों के आग्रह पर सेवा शर्तों व अन्य विषयों के सम्बंध में अनेक महत्वपूर्ण जानकारियों का संक्ष्पित विवरण निम्नवत हैः- 


**मौलिक रिक्ति*-किसी संस्था में पद सृजन, त्यागपत्र देने, मृत्यु होने, स्थानांतरण होने, तथा 50% कोटे के अन्तगर्त पदोन्नति होने से रिक्त रिक्ति मौलिक रिक्ति मानी जाती है।।                              

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*मौलिक सेवाएं*- किसी भी मौलिक रिक्ति में नियुक्त होने के दिनांक से मौलिक सेवा आरम्भ होती है।


*परिवीक्षा काल-*

मौलिक रिक्ति में नियुक्त होने, किसी तदर्थ सेवाओं के विनियमितीकरण होने, स्थानांतरण के बाद कार्यभार ग्रहण करने, नियमित पदोन्नति होने की तिथि से *एक वर्ष के परवीक्षा काल के लिये नियुक्ति होने का प्रावधान है* उसी दिन से मौलिक सेवायें आरम्भ होती है।


सभी प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक, शिक्षक,लिपिक व कर्मचारी की मौलिक रिक्ति में नियुक्ति एक वर्ष के परवीक्षा काल पर होती है। प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक के अलावा शिक्षक, लिपिक व कर्मचारी का परवीक्षा काल में वृद्धि नहीं की जा सकती है। 


*परवीक्षा काल की समाप्ति पर वह स्वतः ही स्थायी हो जाता है।* स्थायीकरण के लिये प्रबन्धसमिति का प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य नहीं है।

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*वरिष्ठता*- मौलिक सेवा के प्रथम दिन से ही वरिष्ठता हेतु सेवा आकंलित की जाती है। यदि एक ही संवर्ग में मौलिक रिक्ति में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि समान हो तो आयु में ज्येष्ठ, वरिष्ठ माना जायेगा।विषय विशेषज्ञों की वरिष्ठता हेतु सेवा, उनके मौलिक रिक्ति में आमेलन की तिथि से मानी जायेगी।                

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*सेवापंजिका*-प्रधानाचार्य की सेवापंजिका प्रबन्धक तथा शिक्षक, लिपिक व कर्मचारियों की सेवापंजिका प्रधानाचार्य की अभिरक्षा में रहनी चाहिये। *सेवा पजिंका, सम्बन्धित को प्रत्येक वर्ष अवलोकित करानी चाहिए, सेवा पजिंका कर्मचारी को उसके सेवा निवृत्त होने पर वापिस दिये जाने का प्रावधान है*।                               


प्रतिकूलप्रवष्ठि-प्रधानाचार्य, शिक्षक, लिपिक की सेवापंजिका में प्रतिकूल प्रवष्ठि सम्बन्धित को संसूचित करने के बाद ही मान्य होगी, अन्यथा वह विधिक रूप से शून्य मानी जायेगी*। 


पदोन्नति-  पदोन्नति दो प्रकार की होती है

(1), तदर्थ व (2) 50%कोटे के अन्तर्गत नियमित पदोन्नति। वर्तमान में प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पद के अलावा *अन्य किसी पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था नहीं है। 50% कोटे के अन्तर्गत पदोन्नति हेतु सम्बन्धित *रिक्ति होने के दिनांक को अर्हं (शैक्षिक एवं पाँच वर्ष का अविरल शिक्षण अनुभव) अनिवार्य है, इसके साथ सम्बन्धित विषय में अध्यापन अनुभव होना अनिवार्य नहीं है। व्यायाम, कला, संगीत, भाषा, शिल्प, आदि के ऐसे शिक्षक जिन्हें प्रशिक्षित स्नातक वेतनक्रम मिल रहा है, 50% कोटे के अन्तर्गत प्रवक्ता पद हेतु शैक्षिक अर्हं होने पर बी.एड.एल.टी. होना अनिवार्य नहीं है। *इस सम्बन्ध में विभागीय स्पष्टीकरण निर्गत हो चुका है*।            

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*स्वतःपदोन्नति*-व्यायाम, कला,संगीत भाषा,आदि विषयों के शिक्षकों को, कुछ शर्तों के आधीन स्वतः ही प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का प्रावधान है,*किन्तु यह सुविधा 25/10/2000के बाद देय नहीं है।अर्थात वर्तमान में यह सुविधा देय नहीं है*।।                 

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*अवकाश*-प्रधानाचार्य, शिक्षकों को आकस्मिक अवकाश 14 दिन, अर्जित अवकाश 01 प्रति वर्ष देय है किन्तु प्रधानाचार्य विशेष परिस्थितियों में 14 से अधिक आकस्मिक अवकाश दे सकता है। *सम्पूर्ण सेवाकाल में अर्द्ध औसत वेतन पर व्यक्ति गत कार्य हेतु 365 दिन, चिकित्सा अवकाश 365 दिन भी देय है *किन्तु 365 दिन के चिकित्सा अवकाश समाप्त होने पर पूरे सेवाकाल में 06 माह का अर्द्ध वेतन पर चिकित्सा अवकाश और देय है*। 


*विशेष*-बिना वेतन अवकाश (L.W.P) लेने पर वरिष्ठता प्रभावित नहीं होती है।। 

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*वेतन संरक्षण*-किसी शिक्षक का उच्च पद या समान पद पर चयन बोर्ड प्रयागराज से चयन होता है तो उसे पूर्व पद (ऐडेड माध्यमिक विद्यालय में ही) पर प्राप्त वेतन को संरक्षित करते हुए नवीन पद के वेतनमान में वेतन निर्धारण किया जायेगा। *यदि समान पद पर चयन हुआ है तो भी उसका पूर्व वेतन संरक्षित करके वार्षिक वेतनवृद्धि का दिनांक यथावत रहेगी*।।             

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*निलम्बन काल में मृत्यु होने पर उसके परिवार जनों को वह सभी लाभ मिलेगे जो उसे जीवित रहने पर मिलते*।।             

*अनुशासनात्मक कार्यवाही*-किसी प्रधानाचार्य, शिक्षक व लिपिक को निलंबित और दण्ड केवल प्रबन्धसमिति, प्रस्ताव पारित के ही कर/दे सकती है। निलम्बित प्रधानाचार्य के सम्बंध में जाँच उप समिति, निलम्बित शिक्षक व लिपिक के विरुद्ध जाँच केवल प्रबन्धक/प्रधानाचार्य ही कर सकता है *विशेष*- किसी भी निलम्बित प्रधानाचार्य, शिक्षक लिपिक अथवा कर्मचारी को निलम्बन काल में विद्यालय में उपस्थित होने की बाध्यता नहीं है केवल जाँच समिति/जाँच अधिकारी आवश्यकता होने पर ही विद्यालय बुला सकता है।।                  


*दण्डात्मककार्यवाही*-किसी भी प्रधानाचार्य, शिक्षक को किसी भी प्रकार लघु अथवा दीर्ध दण्ड चयन बोर्ड प्रयागराज के लिखित अनुमोदन के उपरान्त ही दिया सकता है। यहाँ तक कि दण्ड देने सम्बन्धी नोटिस भी नहीं दिया जा सकता है।।                                  


*किसी अन्य संस्था अथवा विद्यालय में चयन होने पर*-किसी प्रधानाचार्य, शिक्षक का चयन शासकीय अथवा स्थानीय निकाय सेवा में होता है तो उसे वर्तमान विद्यालय से त्यागपत्र देने के बाद ही कार्यमुक्त किया जा सकेगा किन्तु उसे त्यागपत्र देने से पूर्व तीन माह का नोटिस देने की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते उसने उचित माध्यम से आवेदन किया हो। इसी प्रकार चयन बोर्ड से अन्य विद्यालय में चयनित होकर कार्यभार ग्रहण करने पर L.W.P. अनुमन्य नहीं है। 


*प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पद पर तदर्थ पदोन्नति पर वेतन*-------

*किसी वरिष्ठ एवं अर्हं प्रवक्ता/स.अ.की        प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पद पर तदर्थ पदोन्नति हेतु प्रस्ताव प्रबन्धसमिति द्वारा, पद का अधियाचन भेजने तथा पद की रिक्ति 60 दिन तक रहने पर भी नहीं किया जाता है तो चयन बोर्ड अधिनियम 1982 के प्रावधानानुसार जिला विद्यालय निरीक्षक अपने स्तर से तदर्थ पदोन्नति का आदेश जारी कर, प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक वेतनक्रम में वेतन भुगतान सुनिश्चित करेगा। recomposed By chandra shekhar assistant teacher Allahabad





_*माध्यमिक शिक्षक समाज*_

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